Wednesday, May 21, 2014

युवा युग विजेता है...

कल संसदीय दल की बैठक में एवं बैठक से पूर्व जो दृश्य जनमानस के समक्ष उपस्थित हुआ वह निश्चय ही अभिभूत कर देने वाला था। लोकतन्त्र के एक नये युग का सूत्रपात हो चुका है, जिसमें एक नवल स्फूर्ति है, नयी ऊर्जा है और नवोत्थान की अभूतपूर्व प्रेरणा है। जिसकी आत्मा ही दैदीप्यमान शक्तिपुञ्ज से वेष्टित है। लोकतन्त्र मन्दिर है ऐसा पुस्तकों के अलंकृत शब्दों में दिखायी पड़ता था या कतिपय जिह्वाओं पर भूषित होता था परन्तु श्री नरेन्द्र मोदी ने लोकतन्त्र मन्दिर है इस बात को मनसा-वाचा-कर्मणा सिद्ध कर दिया। ड्योढ़ी पर प्रणाम और श्रद्धाज्ञापन हमारी प्राचीन सांस्कृतिक परम्परा है, उस परम्परा का निर्वहन करते हुये न केवल मोदी जी ने अपनी हार्दिक भक्ति दिखायी है अपितु इस देश के जनमानस को परम्पराओं के प्रति श्रद्धा और विश्वास का भी संदेश दिया है।
संशदीय दल की बैठक में श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उच्चरित शब्द-शब्द अत्यन्त विश्वासपूर्ण था। उत्साह, उमंग और उल्लास का जो समावेश उस अद्भुत वाणी में था, उससे जो ऊर्जा निकलती है, वह है आशा की ऊर्जा, विश्वास की ऊर्जा, एक तेजपुञ्ज के स्रुजन और संस्कार की ऊर्जा। यह ऊर्जा न केवल भाजपा एवं उसके कार्यकर्ताओं को अनुप्राणीत करती है अपितु देश के कण-कण को भी प्रमुदित व विह्ँसित करती है। यही ऊर्जा वह गति है जो वस्तुतः इस युवा देश को चाहिये। यही ऊर्जा वह द्युति है जिसकी चपलता, चंचलता एवं शक्ति की हमें अपेक्षा है। देश की जनता ने लोकतन्त्र की पुनर्टीका की है और लोकतान्त्रिक परम्परा के प्रवाह हो आगे बढ़ाया है। आज देश ऊर्जस्वित है। निश्चय ही तेजस्वी भारत का निर्माण होगा, इस बात के प्रति आशान्वित है।
इस चुनाव ने यह भी सिद्ध कर दिया की वास्तव में युवाओं में वह क्षमता है कि वह नव-युग का सूत्रपात कर सकें, एक नया इतिहास रच सकें ।
य़ुवा इतिहास सृजेता है।
युवा युग विजेता है॥

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