Friday, June 19, 2015

तुम किस मुँह से बोल रहे हो?

आजकल गहरे लाल से खूनी लाल, रक्तपिपासु लाल और थक-हारकर हल्के लाल बने जितने वामपंथी संगठन और गिरोह इस देश में परजीवियों की तरह पल रहे हैं वे भी कांग्रेसी सुर में अपनी चिरपरिचित शैली में #Lalitmodi प्रकरण पर हुका-हुवाँ-हुवाँ कर रहे हैं। इसमें तनिक भी आश्चर्य नहीं है। यही इन आस्तीन के साँपों की कार्यनीति रही है जिसके कारण ये स्वतन्त्रता के बाद से ही एक दबाव समूह बनाकर भारत सरकार से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से अपनी बेजा माँगे मनवाते रहें हैं और ऐश फरमाते रहे हैं। ये गरीबों, दलितों एवं महिलाओं के आँसुओं में उपस्थित सोडियम की मात्रा का सौदा करके अपना घरौंदा मजबूत करते रहे हैं। आज जब सरकाअर के विकासोन्मुख नीतियों द्वारा इनके सोडियम के धन्धे में दिनोंदिन कमीं आ रही है और दुकान पर ताला लगने की आशंका है तो ये  उस जोंक की तरह छटपटा रहें हैं जो किसी पशु के शरीर से खून चूस-चूसकर मोटी हो रही थी पर अभी-अभी उस पर नमक दाल दिया गया हो।
इन्हें ठीक से पहचानने का यह सुअवसर है। ये वही लोग हैं जो अफजल गुरु की फाँसी का विरोध करते हैं और मानवाधिकार की दुहाई देते हुये मार्च करते हैं। ये वही लोग हैं जो गिलानी से गलबहियाँ डाले खड़े दिखायी देते हैं। ये वही लोग हैं तो तरुण तेजपाल जैसे महिलाओं के प्रति अत्याचारी व्यक्ति को अन्तिम क्षण तक सच्चरित्र घोषित करने का प्रयास करते हैं, ये वही लोग हैं जो #Shobha_Mandi जैसी अनगिनत वनवासी, गिरिवासी महिलाओं से बलात्कार करके स्त्रीपक्षधर का मुखौटा पहने रहते हैं ये वही लोग हैं जिन्होंने अपने शासन काल में #Tapasi_Malik की बलात्कार करने के बाद हत्या की। वस्तुतः इनका कोई चरित्र ही नहीं है और बोलने की कोई औकात भी नहीं पर पिछले ६० सालों से शासन-तन्त्र इनकी बकबक सुनता आया है और आज नहीं सुन रहा है इसलिये ये बौरा गये हैं। इनको बौखलाहट भी है कि ये धीरे-धीरे अप्रासंगिक हो रहे है, इनका चेहरा जनता के सामने साफ हो रहा है ।
वृंदा करात को भी बहुत पीड़ा है ऐज़यूज़ुअल...पर बंगाल को कंगाल करते समय सीपीआई एम के उच्च पद पर बैठी इस महिला को कोई पीड़ा नहीं हुयी। बंगाल और केरल में अपने शासन के इतिहास में दलितों, महिलाओं और वनवासियों पर इनका इतना भी वात्सल्य नहीं उमड़ा और करुणा नहीं उपजी कि उनमें से कोई एक भी इनकी पार्टी में शीर्ष न सही शीर्ष से एक पग नीचे तक पहुँच पाता।
आतंकवादियों के मानवाधिकार के पैरोकार आज मानवता के आधार पर की गयी एक छोटी सी सहायता के प्रति इतने लामबद्ध हो रहे हैं, यह इनका चरित्र दर्शाता है, स्वभाव बताता है और मनोभावों को उद्घाटित भी करता है।
भोपाल गैस काण्ड के मुख्य अभियुक्त वॉरेन एण्डरसन को बचाने वाली कांग्रेस और ओतावियो क्वात्रोची से रिश्ता निभाकर राष्ट्रदोह करने वाली कांग्रेस किस मुँह से ललित मोदी प्रकरण पर सुषमा स्वराज जी का त्यागपत्र माँग रही है? जब कांग्रेस ने हजारों निर्दोषों के मौत के दोषी को तो अपने आँचल में छिपाकर देश से बाहर पहुँचाया था तब इस्तीफा क्यों नहीं माँगा? जब इटली के हाथ भारत को गिरवी करने के षड्यन्त्र का पर्दाफाश हुआ तब इस्तीफा क्यों नहीं माँगा? जो कांग्रेस मानवता के हत्यारों को बचाते हुये कभी सकुचायी नहीं, शर्मायी नहीं, पछतायी नहीं वह भला मानवता के आधार पर किसी की तनिक भी सहायता कैसे सहन कर रकती है? मानवता को मण्डियों में बेचने का परम्परागत कारोबार जो रहा है कांग्रेस का। पर कमसे कम गुनाहगारों को किसी के सदाशयपूर्ण कार्य पर हो-हल्ला मचाकर गुनाह साबित करने की जुर्रत नहीं करनी चाहिये। #Sushamaswaraj ने वही किया जो भारतीय चिति के अनुरूप है। मानवता की पहचान है और विदेश मन्त्री ने उस पहचान के अनुरूप ही कदम उठाया।
और जो लोग इस बात को लेकर कुछ ज्यादा ही ’कन्सर्न’ हं कि #lalitmodi एक एक्यूज्ड हैं और उनकी सहायता हुयी, वे पहले लालू यादव जैसे अपराधियों के साथ बैठना बन्द कर दें जो न केवल एक्यूज्ड रहें है बल्कि जिनको कोर्ट से बाकायदा सजा मिल चुकी है। ऐसा करने के बाद लोग बात करें कि एक विदेश मन्त्री को देश का कोई नागरिक बाहर किसी देश में संकट में है, उसके साथ कैसा व्यवहार करना चाहिये।

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