
आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक पूज्य डॉ. हेडगेवार जी की पुण्यतिथि के अवसर पर भारत नीति प्रतिष्ठान द्वारा "डॉ. हेडगेवार एवं भारतीय राष्ट्रवाद" विषय पर व्याख्यान का आयोजन हुआ। जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. कृष्णगोपाल जी, सरकार्यवाह (राष्टीय स्वयंसेवक संघ) का उद्बोधन सुनने का अवसर प्राप्त हुआ। प्रो. कपिल कपूर जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की एवम् डॉ. अवनिजेश अवस्थी जी ने कार्यक्रम का विद्वत्तापूर्ण, सुव्यवस्थित एवं सफल सञ्चालन किया।
डॉ. कृष्णगोपाल जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि "भारत का प्रत्येक व्यक्ति स्वीकार करता है कि पूरा समाज एक है। यहाँ कोई भी प्रार्थना ऐसी नहीम् है जिसमें सबके कल्याण की बात न करके एक व्यक्ति के कल्याण की बात की गयी हो। इस देश का मौलिक सिद्धान्त है "सर्वे भवन्तु सुखिनः", "एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति" । इस सिद्धान्त के सर्वजनसमन्वय में एकात्मबोध है। केवल अपने लिये चिन्तन करने वाला अभारतीय है। पूर्वोत्तर की २२२ जनजातियों में किसी ने कभी भी एक -दूसरे पर अतिक्रमण नहीं किया, न ही दूसरे की पूजा-पद्धति और मान्यताओं को अमान्य बताया। यह है भारत के मौलिक सिद्धान्त में निहित सहिष्णुता की भावना। यह है भारत का मौलिक प्रवाह। जो परम्परा के प्रवाह में हजारों वर्ष से प्रवाहित है, वह है राष्ट्रदर्शन। जो पचाने का एवं सहिष्णुता का साहस रखना है वह दर्शन हिन्दु-राष्ट्र का है। जो भी राष्ट्र-तत्त्व की गहराई में जायेगा उसे इसी मौलिकता का दर्शन होगा। इसी सनातल सत्य को समझकर निष्ठा के साथ प्रवाहित होने वाली धारा है संघ।"
इस अवसर पभारत नीति प्रतिष्ठान के निदेशक एवं संघ-विचारक प्रो. राकेश सिन्हा जी ने "डॉ. हेडगेवार एवं उपनिवेशविरोधी आन्दोलन" विषय पर प्रकाश डालते हुये राष्त्राय स्वयंसेवक संघ की विभिन्न स्वतन्त्रता आन्दोलनों में भूमिका पर तथ्यपूर्ण प्रकाश डाला तथा उन्होंने बताया कि किस प्रकार संघ की स्वतन्त्रता आन्दोलन में भूमिका को इस देश के मार्क्सवादी, नेहरूवादी इतिहासकारों द्वारा नियोजित तरीके से नजरअन्दाज किया गया है और किस प्रकार राष्ट्रीय अभिलेखागार में संघ से सम्बन्धित दस्तावेजों को नष्त करने की दुर्नीति अपनायी गयी है। तथ्यों से खिलवाड़ और तथ्य छुपाने का एक ज्वलंत उदाहरण प्रस्तुत करते हुये उन्होंने संविधान सभा में २ माह तक धर्मनिरपेक्षता पर चली बहस (जिसका इतिहासकार कहीं उल्लेख तक नहीं करते) एवं नेताजी बोस द्वारा शम्कर राव देव को RSS पर लिखे पत्र एवं शम्कर राव देव द्वारा उसके उत्तर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संघ की भूमिका को लेकर मार्क्सवादी, नेहरूवादी इतिहासकारों ने न केवल चुप्पी साधी है बल्कि उसके दस्तावेजों को नष्ट करने का भी काम किया है।
प्रो. कपिल कपूर जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि डॉ. हेडगेवार अपने समय के विभिन्न क्रान्तिकारी एवं राष्ट्रवादी व्यक्तियों से इसी रूप में भिन्न हैउं कि उन्होंने गुरु गोरखनाथ और गुरु अर्जुनसिंह जैसे एक संगठन खड़ा किया और उस संगठन के माध्यम से आत्मजागरण को प्रोत्साहित कर समाज को एक ऊर्जा एवं विश्वास से भरा, सोये सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जागृत करने एवं पुनर्प्रतिष्ठित करने का बीड़ा उठाया।
#RSS #IPF #nationalism ॑#राष्ट्रवाद,
डॉ. कृष्णगोपाल जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि "भारत का प्रत्येक व्यक्ति स्वीकार करता है कि पूरा समाज एक है। यहाँ कोई भी प्रार्थना ऐसी नहीम् है जिसमें सबके कल्याण की बात न करके एक व्यक्ति के कल्याण की बात की गयी हो। इस देश का मौलिक सिद्धान्त है "सर्वे भवन्तु सुखिनः", "एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति" । इस सिद्धान्त के सर्वजनसमन्वय में एकात्मबोध है। केवल अपने लिये चिन्तन करने वाला अभारतीय है। पूर्वोत्तर की २२२ जनजातियों में किसी ने कभी भी एक -दूसरे पर अतिक्रमण नहीं किया, न ही दूसरे की पूजा-पद्धति और मान्यताओं को अमान्य बताया। यह है भारत के मौलिक सिद्धान्त में निहित सहिष्णुता की भावना। यह है भारत का मौलिक प्रवाह। जो परम्परा के प्रवाह में हजारों वर्ष से प्रवाहित है, वह है राष्ट्रदर्शन। जो पचाने का एवं सहिष्णुता का साहस रखना है वह दर्शन हिन्दु-राष्ट्र का है। जो भी राष्ट्र-तत्त्व की गहराई में जायेगा उसे इसी मौलिकता का दर्शन होगा। इसी सनातल सत्य को समझकर निष्ठा के साथ प्रवाहित होने वाली धारा है संघ।"
इस अवसर पभारत नीति प्रतिष्ठान के निदेशक एवं संघ-विचारक प्रो. राकेश सिन्हा जी ने "डॉ. हेडगेवार एवं उपनिवेशविरोधी आन्दोलन" विषय पर प्रकाश डालते हुये राष्त्राय स्वयंसेवक संघ की विभिन्न स्वतन्त्रता आन्दोलनों में भूमिका पर तथ्यपूर्ण प्रकाश डाला तथा उन्होंने बताया कि किस प्रकार संघ की स्वतन्त्रता आन्दोलन में भूमिका को इस देश के मार्क्सवादी, नेहरूवादी इतिहासकारों द्वारा नियोजित तरीके से नजरअन्दाज किया गया है और किस प्रकार राष्ट्रीय अभिलेखागार में संघ से सम्बन्धित दस्तावेजों को नष्त करने की दुर्नीति अपनायी गयी है। तथ्यों से खिलवाड़ और तथ्य छुपाने का एक ज्वलंत उदाहरण प्रस्तुत करते हुये उन्होंने संविधान सभा में २ माह तक धर्मनिरपेक्षता पर चली बहस (जिसका इतिहासकार कहीं उल्लेख तक नहीं करते) एवं नेताजी बोस द्वारा शम्कर राव देव को RSS पर लिखे पत्र एवं शम्कर राव देव द्वारा उसके उत्तर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संघ की भूमिका को लेकर मार्क्सवादी, नेहरूवादी इतिहासकारों ने न केवल चुप्पी साधी है बल्कि उसके दस्तावेजों को नष्ट करने का भी काम किया है।
प्रो. कपिल कपूर जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि डॉ. हेडगेवार अपने समय के विभिन्न क्रान्तिकारी एवं राष्ट्रवादी व्यक्तियों से इसी रूप में भिन्न हैउं कि उन्होंने गुरु गोरखनाथ और गुरु अर्जुनसिंह जैसे एक संगठन खड़ा किया और उस संगठन के माध्यम से आत्मजागरण को प्रोत्साहित कर समाज को एक ऊर्जा एवं विश्वास से भरा, सोये सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जागृत करने एवं पुनर्प्रतिष्ठित करने का बीड़ा उठाया।
#RSS #IPF #nationalism ॑#राष्ट्रवाद,
इस अवसर पर डॉ. राहुल सिंह, श्री गोपाल अग्रवाल, डॉ. शरदिन्दु मुखर्जी सहित बडी संख्या में प्रबुद्ध जन एवं छात्र-छात्राओं तथा शोधार्थियों की उपस्थिति रही।
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