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मोदी जी ने ठीक ही तो कहा राहुल को बच्चा

मोदी जी द्वारा राहुल माइनो के लिये ’बच्चा’ सम्बोधन सटीक एवं उपयुक्त है। इससे मोदी जी का शब्दसामर्थ्य पता चलता है। ’बाल’ /’वत्स’ जिसका अपभ्रंश रूप ’बच्चा’ है, उनके लिये भी प्रयुक्त होता है, जो किसी विषय, विधा अथवा शास्त्र में अनभिज्ञ हों अथवा उसके विषय में जानकारी प्राप्त करने की शुरुआत कर रहे हों। जैसे यदि कोई व्यक्ति ’जर्मन’ भाषा सीखना प्रारम्भ करता है तो वह ’जर्मन’ भाषा के लिये ’बच्चा’ ही होगा। यद्यपि राहुल ’आयुवृद्ध’ हैं परन्तु यह बात भी सत्य है कि वे ’ज्ञान-बाल’ हैं। ’अनुभव-बाल’ भी उनको कहा जा सकता है। राजनीति में मुख्यतः तीन प्रकार के पौधे होते हैं- (१)जंगल में स्वयं के लिये संघर्ष करके उगे देवदार, (२) गमले में किसी के द्वारा रोपे एवं संरक्षित किये गया सजावटी गेंदा (गेंदा इसलिये कि इसमें अपना कुछ एण्टीबैक्टीरियल गुण तो होता है। यद्यपि दूसरों के हाथों रोपे जाते हैं) (३) ग्रीन हाउस में गम्भीर संरक्षण (ICU) में पले-बढ़े पौधे, जिनको वह धूप भी कुम्हला देती है, जिसके लिये ’देवदार’ संघर्ष करते हैं। राहुल गाँधी तीसरी कोटि के पौधे हैं। हम सभी जानते हैं कि ग्रीन हाउस की उपज कितनी क्षणिक एवं कितनी बालसुलभ, कितनी कोमल होती है। आत्मविकास की तो वहाँ तनिक बात तक नहीं होती। क्या हार्मोन कैसे डाला जायेगा ये वैज्ञानिक और किसान तय करते हैं । फसल कैसी होगी, पौधा कैसे बढ़ेगा, कब कितना उत्पादन करेगा यह भी पूर्वानुमानित और तय होता है। सभी सुख-सुविधायें व एशोआराम के बीच पले ग्रीनहाउस के पौधे हमेशा ’बाल’ बने रहते हैं, यही इनकी खासियत है । जिसके कारण बाजार के वर्ग-विशेष में इनकी माँग बनी रहती है। खैर...ठीक ही तो कहा महोदय अभी ’बच्चे’ हैं, फिर इतनी तिलमिलाहत क्यों? यदि इतनी तिलमिलाहट ही है, तो आखिर ’युवा’ कहने पर तमतमाहट क्यों नहीं? जबकि युवा की राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय तय आयुसीमा के अन्तर्गत भी राहुल नहीं आते। तो फिर राहुल को ’वृद्ध’ क्यों न कहा जाय? यदि सब पर उनके और उनके अनुयायियों को आपत्ति है, तो क्या नयी श्रेणी गढ़ी जाय, जिसमें नेहरू-खान-माइनो-"गांधी" परिवार का एकाधिकार हो, जिसे दिल्ली के श्मशानों पर।

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