Wednesday, December 3, 2014

ज्योतिष विज्ञान है, अन्धविश्वास नहीं ।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने विभिन्न चैनलों पर ज्योतिष-कार्यक्रम दिखाये जाने पर आपत्ति की है तथा ज्योतिष को अन्धविश्वास फैलाने वाला बताया है।
ज्योतिष वैदिक काल से गहन गणितीय एवं खगोलीय गणना पर आधरित ज्ञान की एक विधा है। ज्योतिष छः वेदाङ्गों में से एक वेदाङ्ग है। ज्योतिष को वेदपुरुष की आँख माना गया है। इतनी प्राचीन एवं दीर्घकाल से प्रवर्तित, समाज में वेष्ठित और जन-मन में अनुस्यूत विद्या को क्षण भर में अंधविश्वास बता देना अज्ञानता का बोधक है तथा साथ ही साथ इस बात से दुराग्रह, द्वेष एवं षड्यन्त्र भी व्यक्त होता है।
ज्योतिष विज्ञान है। उसकी गणनाओं में वैज्ञानिकता है। विश्वास और अविश्वास व्यक्ति का व्यक्तिगत प्रश्न है परन्तु किसी के विश्वास पर कुठाराघात करना एवम् उसे सरासर अन्धविश्वास बता देना बोना किसी विशेष अध्ययन एवम् वस्तुस्थिति जाने न केवल अन्याय है अपितु अपराध भी है।
भारत में एक समय था जब न्यायालयों के न्यायाधीश अथवा वे लोग जिनको किसी विषय पर निर्णय देना होता था, पूर्वपक्ष और उत्तरपक्ष, अर्थात् दोनों पक्षों का ज्ञान प्राप्त करते थे, तब कोई निर्णय देते थे। एक गलत निर्णय न केवल वर्तमान को प्रभावित करता है अपितु भविष्य को भी नष्ट-भ्रष्ट कर देता है। न्यायाधीशों को कोई निर्णय देने से पहले कम से कम कुछ संस्कृत और ज्योतिष अवश्य पढ़नी चाहिये अथवा योग्य विद्वानों से सम्पर्क अवश्य करना चाहिये। ज्योतिष कभी अपना ज्ञान किसी पर थोपता नहीं अपितु जनविश्वास अर्जित करता है। इसी विश्वासार्जन का परिणाम है कि विभिन्न कालानुक्रमों में अनगिनत आक्रमण एवम् आघात सहकर भी आज यह विद्या जीवित है...केवल पुस्तकों एवं ग्रन्थों में नहीं अपितु जन-मन में एवं जन-विश्वास में। इस विश्वास पर लात मारना इतना सहज विषय नहीं है। आज
के उच्च न्यायालय से पहले भी अनेक लोग और शासक ऐसा कर चुके हैं और सभी को मुँह की खानी पड़ी है।
सदियों से प्रायोगिक विद्या को क्षण में अन्धविश्वास कह देना एक क्रूर मजाक है। विश्वास और अन्धविश्वास के मध्य अन्तर को समझना बहुत आवश्यक है। ज्योतिष कभी अन्धश्रद्धा और अन्धविश्वास को बढ़ावा नहीं देता और न ही यह कहता है कि हाथ पर हाथ धरे बैठे रहो, सब कुछ तुम्हारे पास आयेगा। हाँ यह बात अवश्य सत्य है कि ज्योतिष विद्या की कुछ लोग दुकान खोलकर अवश्य बैठ गये हैं जिनको इसक रञ्चमात्र भी ज्ञान नहीं है। ऐसे ढोंगियों, आडम्बरियों को पहचानना आज की आवश्यकता है। चन्द ढोंगियों के ढोंग की ओट में न्यायालय समस्त ज्ञान-सम्पदा को ढोंग और आडम्बर नहीं बता सकता।
ज्योतिष के भग्नावशेष देखने की इच्छा रखने वालों के मंसूबे कभी पूरे नहीं होंगे।

No comments: